भारत और नेपाल के दंत चिकित्सकों की कार्यशाला एम्स में आयोजित

वेबवार्ता. नई दिल्ली। बच्चों के कटे होठ जैसे चेहरे की विकृति का सही इलाज करने के मकसद से देश भर से तथा नेपाल से आये 100 से अधिक दंत चिकित्सकों के प्रशिक्षण के लिए एक कार्यशाला का आयोजन यहां अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में किया गया । प्लास्टिक सर्जन, दंत चिकित्सक, बाल रोग विशेषज्ञ, नैदानिक आनुवंशिकीविद और नैदानिक मनोवैज्ञानिक सहित चिकित्सा एवं दंत चिकित्सा जगत के विशेषज्ञों ने कटे होठ के इलाज के पूर्ण प्रोटोकॉल के बारे में प्रतिभागियों को संवेदनशील बनाया। इस दौरान खराब दंत संरेखण और चेहरे पर विकृति को ठीक करने पर अधिक जोर दिया गया। कटे होठ या तालु में छेद एक ऐसी स्थिति है जब एक अजन्मे बच्चे में विकसित हो रहे होंठ के दोनों किनारे पूरी तरह से आकार नहीं ले पाते हैं । यह पोषण को प्रतिकूल रूप से प्रभावित करने के अलावा सीने में संक्रमण, कान की समस्या, खराब बोली और चबाने में असमर्थता की समस्या पैदा करता है । क्लेफ्ट क्रेनियोफेसियल आर्थोडोंटिस्ट और एम्स के दंत शिक्षा एवं अनुसंधान केंद्र के प्रमुख प्रोफेसर ओ पी खरबंदा ने बताया कि दांतों का असामान्य विन्यास, खराब जबड़े और चेहरे की बदसूरती एक बच्चे को सामाजिक और कार्यात्मक रूप से विकलांग बनाती है । इस कार्यशाला को अन्य आर्थोडोंटिस्ट ने भी संबोधित किया।


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मैं पिछले 19 साल से पत्रकारिता से जुड़ा हूं। मैने अपने कैरियर की शुरूवात लोकल अखबारों से की। वर्ष 2001 में दैनिक भास्कर के साथ जुड़ने का अवसर मिला। 2008 की शुरूवात में दैनिक भास्कर का साथ छुटा। इसके बाद मैने इंडिया न्यूज में गाजियबाद-नोएडा में ब्यूरो प्रभारी के रूप में काम किया। कई समाचार पत्रों में काम करने के बाद अक्टूबर 2009 में एनसीआर टुडे समाचार पत्र शरू किया। वर्तमान में उत्तर प्रदेश सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हूँ। मेरे मोबाइल नंबर 9899683800,पर किया जा सकता है।

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