दिल्ली आईआईटी द्वारा 2016 में सौंपी गई ड्रेनेज मास्टर प्लान पर अभी तक कोई कार्यवाही नहीं

एनसीआर टुडे. नई दिल्ली। नेता विपक्ष विजेन्द्र गुप्ता के नेतृत्व में विधायक ओम प्रकाश शर्मा, कपिल मिश्रा, जगदीश प्रधान, अनिल वाजपेयी तथा देवेन्द्र सहरावत ने आज एनवायरमेंट पॉल्यूशन (प्रिवेंशन एण्ड कंट्रोल) अथॉरिटी (म्च्ब्।) को दिल्ली सरकार के नालों से सिल्ट निकालने के काम की फील्ड इंस्पेक्शन रिपोर्ट सौंपी। विधायकों के प्रतिनिधी मंडल ने मांग करी कि आगामी वर्षा ऋतु के दौरान दिल्ली की सड़कों व कॉलोनियों को जल भराव तथा ट्रैफिक जाम से मुक्ति दिलाने के लिए ईपीसीए अविलम्ब आवश्यक कार्यवाही करे। उन्होंने यह भी कहा कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल को भी इस रिपोर्ट से अवगत कराया जाए तथा दिल्ली सरकार को अविलम्ब अपने काम में चुस्ती-फुरती दिखाने और गम्भीरता से काम करने के आदेश दिये जाएं। उक्त रिपोर्ट विधायकों के लोक निर्माण विभाग (पीडब्लुडी) तथा सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग (आई एण्ड एफसी) के नालों से कीच निकालने के चल रहे काम के मूल्यांकन के बाद दी गई।


नेता विपक्ष ने बताया कि विधायकों द्वारा ईपीसीए को सौंपी गई रिपोर्ट में जानकारी दी गई कि लोक निर्माण विभाग (पीडब्लुडी) तथा सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग (आई एण्ड एफसी) के लगभग 85 प्रतिशत नालों की सफाई नहीं हुई है। सरकार द्वारा निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार यह कार्य 15 जून तक समाप्त हो जाना चाहिए था, परन्तु सरकारी विभाग अपने लक्ष्य से काफी पीछे चल रहे हैं। अधिकतर नालों से असहनीय बदबू आ रही है और आस-पास के निवासियों का जीवन दूभर हो गया है। जहां-जहां से सिल्ट निकाली जाती है, वहां से उसे कई दिनों तक उठाया ही नहीं जाता है।


नेता विपक्ष ने कहा कि रिपोर्ट में इस बात पर खेद व्यक्त किया कि दिल्ली सरकार ने अब तक ड्रेनेज मास्टर प्लान पर कोई कार्यवाही नहीं करी है। यह प्लान दिल्ली के इंडियन इन्स्टीट्यूट ऑफ टैक्नोलॉजी ने तैयार करी थी और इसे वर्ष 2016 में दिल्ली सरकार को सौंपा गया था। उन्होंने बताया कि पिछली ड्रेनेज मास्टर प्लान 1976 में तैयार की गई, जब दिल्ली की जनसंख्या 60 लाख थी और अब 2021 तक जनसंख्या 2.5 करोड़ पहुंचने वाली है। अतः पुरानी मास्टर प्लान पर आधारित सभी मापदंड और उपाय अमान्य हो चुके हैं।


विजेन्द्र गुप्ता ने कहा कि विधायकों ने जो अपनी रिपोर्ट सौंपी है उसमें अनेक महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए गए हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्षा ऋतु के दौरान नाले साफ न होने के कारण सामान्य जीवन के ठप्प हो जाने और दिल्लीवासियों को भारी असुविधा होने की आशंका है। इसके कारण जगह-जगह पानी भर जाता है, ट्रैफिक जाम होने की संभावना है। इसके साथ ही साथ जल जनित बिमारियों का फैलना भी आवश्यभावी है।


रिपोर्ट में सुझाव दिये गए हैं कि यदि स्टोर्म वाटर ड्रेन्स की सफाई नहीं की गई तो भयंकर जलभराव से बचना संभव नहीं होगा। इस प्रणाली को सीवेज तथा सॉलिड वेस्ट से मुक्त रखना अतिआवश्यक है। पार्कों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग अवश्य की जानी चाहिए। एक फुट गहरे बड़े गड्डे खोदने चाहिए ताकि जल संचयन भी हो तथा नालियों व ड्रेनेज सिस्टम पर बोझ भी डायवर्ट हो सके। स्टोर्म वाटर डेªन्स को अतिक्रमणों से मुक्त किया जाना चाहिए। प्रकृतिक अथवा सरकार द्वारा बनाई गई स्टोर्म वाटर ड्रेन को सॉलिड वेस्ट से पूरी तरह मुक्त रखना अतिआवश्यक है।


दिल्ली सरकार ने डिसिलटिंग के काम पर ध्यान नहीं दिया और इसके साथ ही साथ न ही इसकी प्रगति की कोई मॉनिटरिंग करी। 14 अप्रैल को शुरू हुए काम को 15 जून तक खत्म हो जाना चाहिए था। परन्तु यह चिन्ता का विषय है कि अभी भी 85 प्रतिशत काम शेष रहता है। अतः सरकार को इस ओर गम्भीरतापूर्वक काम करना चाहिए।


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मैं पिछले 19 साल से पत्रकारिता से जुड़ा हूं। मैने अपने कैरियर की शुरूवात लोकल अखबारों से की। वर्ष 2001 में दैनिक भास्कर के साथ जुड़ने का अवसर मिला। 2008 की शुरूवात में दैनिक भास्कर का साथ छुटा। इसके बाद मैने इंडिया न्यूज में गाजियबाद-नोएडा में ब्यूरो प्रभारी के रूप में काम किया। कई समाचार पत्रों में काम करने के बाद अक्टूबर 2009 में एनसीआर टुडे समाचार पत्र शरू किया। वर्तमान में उत्तर प्रदेश सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हूँ। मेरे मोबाइल नंबर 9899683800,पर किया जा सकता है।

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