एनसीआर टुडे. नई दिल्ली। भोपाल लोकसभा क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी(भाजपा) की घोषित उम्मीदवार साध्वी प्रज्ञा ठाकुर को चुनाव लड़ने से रोकने के लिए अदालती और राजनीतिक मुहिम तेज हो गई है। मालेगांव विस्फोट में मारे गए लोगों के परिजनों ने जहां प्रज्ञा ठाकुर को चुनाव लड़ने से रोकने के लिए अदालत से गुहार की है, वहीं राजनीतिक विरोधियों ने आतंकवादी घटनाओं में लिप्त एक व्यक्ति को उम्मीदवार बनाने के लिए भाजपा की निंदा की है।
मालेगांव विस्फोट में मारे गए एक व्यक्ति सैयद अजहर निसार अहमद के पिता निसार अहमद सैयद बिलाल ने मुंबई स्थित राष्ट्रीय जांच एजेंसी अदालत में एक दरखास्त कर आग्रह किया है कि प्रज्ञा ठाकुर को चुनाव लड़ने से रोका जाए। इसमें कहा गया है कि प्रज्ञा ठाकुर को खराब स्वास्थ्य के आधार पर जमानत मिली थी।
उनके चुनाव मैदान में कूदने से यह जाहिर है कि वह भली चंगी हैं और चुनाव लड़ने के लिए शारीरिक रूप से सक्षम हैं। अपने स्वास्थ्य को लेकर उन्होंने न्यायालय को गुमराह किया था। जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कांफ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने साध्वी की जमानत रद्द किए जाने की मांग की है।
उन्होंने कहा कि यदि उनका स्वास्थ्य इस लायक नहीं है कि उन्हें जेल में रखा जा सके तो वह चुनाव लड़ने के लिए किस तरह भली चंगी हो सकती हैं। उमर की ही तरह पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने भी साध्वी को उम्मीदवार बनाए जाने पर भाजपा की तीखी आलोचना की थी। एआईएमआईएम के नेता असदुद्दीन ओवैसी ने इसे भाजपा की निर्लजता कहा है। यह पार्टी एक आतंकवाद की अभियुक्त को प्रतिष्ठा देने का प्रयास कर रही है। उन्होंने पूछा कि क्या यही भारतीय जनता पार्टी का आतंकवाद के प्रति जीरो टोलरेंस है।
महाराष्ट्र के दलित नेता प्रकाश आम्बेडकर ने भी साध्वी की उम्मीदवारी का विरोध किया है। इन सारी आलोचनाओं को साध्वी प्रज्ञा ठाकुर ने खारिज करते हुए कहा कि हिन्दू विरोधी ताकतों ने उन्हें जेल में मारने का षड्यंत्र किया था, जिसमें वे सफल नहीं हुए। उन्होंने कहा कि भोपाल का चुनाव उनके लिए धर्मयुद्ध जैसा है जिसमें वह विजयी होंगी। प्रज्ञा ठाकुर ने दावा किया कि उन्हें जांच एजेंसियों से क्लीन चिट मिल गई है।