कितने संस्कारी बच्चे

(वुसअतुल्लाहखान) सब कहते हैं धरती मां हैलेकिन जिस तरह हम सबने मिलकर इस मां के सिर से पर्यावरण की चादर उतारी है, उसके बाद हमें धरती को मां कहने का क्या हुक है। चलिए धरती मेरी और आपकी मां है तो हमारा बाप कौन है? दरियाज्यह दरिया ही तो हैजो धरती की मांग में सिंदूर की तरहगुज़रता है और धरती की गोद हरी-भरी रखता है। धरती और दरिया न हो तो हमारी क्या औकात।। । मगर धरती माता के साथ हम जो कर रहे हैं सो कर रहे हैं, पिताजी के साथ हमारा व्यवहार तो इससे भी ज्यादा बेरहम है। रोजाना लाखों टन कचरा, औद्योगिक कूड़ा, कैमिकल्स, गंदा तेल दरिया पिता के मंह पर कालिख की तरह मल रहे हैं। हम कितने संस्कारी बच्चे हैं, हैं न! बेवकुफी की इंतहा यह है कि एकतरफ तो हम रोते हैं कि अगले दो-ढाई दशक के बाद हम पानी की बूंद- बंद को तरसेंगे। मगर आज नदी-नालों-झीलों- बारिश की शक्ल में जो मीठा पानी उपलब्ध हैउसे हम साफ करके महफूज और जमा करने की बजाय उसमें दुनियाभर का गंद घोल रहे हैं और चीख भी रहे हैं। सब कहते हैं सिंधु नदी पाकिस्तान की जीवनरेखा है। सबको मालूम है कि सिंधुदरिया न हो तो पाकिस्तान रेगिस्तान हो जाए। कल ही मैं पढ़ रहा था कि जहां तक धरती और दरिया से अच्छे व्यवहार की बात है तो इसमें भारत हो या पाकिस्तान दोनों तरफ एक जैसी हरकतें हो रही हैं।दाखल होता है, उसका बायोटेक्नोलॉजी के जरिए ट्रीटमेंट किया जा रहा है और इलाहाबाद से ऊपर दरिया के किनारे कायम कानपुर के कारखानों को अस्थाई तौर पर बंद कर दिया गया है। इसका मतलब है कि नीयत हो तो नदी-नालोंझीलों की सफाई कोई रॉकेट साइंस नहीं। कहते हैंअगली जंग पानी की वजह से होगीआप बेशक पानी के लिए एक-दूसरे का खून बहाने से मत चूकना। मगर गंदे पानी के लिए नहीं साफ पानी के लिए एक-दूसरे के लिए लड़े। ऐसा हो जाए तो शायद इसके बाद आप एक-दूसरे से पानी पर लड़ने की भी नसोचें।।


भारतीय प्रदूषण कंट्रोल बोर्डकहता है कि गंगा और नर्मदा समेत देश के 445 में से 275 दरिया इतने प्रदूषित हो चुके हैं कि उनका पानी इंसानों के पीने के लायक नहीं है। ऐसे में प्रयागराज से गंगा और जमुना के संगम से यह अच्छी खबर आई है कि इस बार कुंभ मेले के यात्री साफ नीली गंगा में डुबकी लगा रहे हैं क्योंकि इलाहाबाद के संगम में रोजाना जो 270 मिलियन लीटर गंद दरिया में


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मैं पिछले 19 साल से पत्रकारिता से जुड़ा हूं। मैने अपने कैरियर की शुरूवात लोकल अखबारों से की। वर्ष 2001 में दैनिक भास्कर के साथ जुड़ने का अवसर मिला। 2008 की शुरूवात में दैनिक भास्कर का साथ छुटा। इसके बाद मैने इंडिया न्यूज में गाजियबाद-नोएडा में ब्यूरो प्रभारी के रूप में काम किया। कई समाचार पत्रों में काम करने के बाद अक्टूबर 2009 में एनसीआर टुडे समाचार पत्र शरू किया। वर्तमान में उत्तर प्रदेश सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हूँ। मेरे मोबाइल नंबर 9899683800,पर किया जा सकता है।

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