सुप्रीम कोर्ट में यूनिटेक के एमडी संजय चन्द्रा और उनके भाई की जमानत अर्जी खारिज

एनसीआर टुडे. नई दिल्ली।
नई दिल्ली, 23 जनवरी (वेबवार्ता)। सुप्रीम कोर्ट ने निवेशकों के करोडों रुपये के गड़बड़झाले में फंसे यूनिटेक के एमडी संजय चन्द्रा और भाई अजय चन्द्रा को राहत देने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने दोनों की जमानत अर्जी को खारिज कर दिया है।
दोनों पिछले साल 9 अगस्त से जेल में बंद हैं। कोर्ट ने जमानत देने के लिए 750 करोड़ रुपये जमा करने को कहा था। 7 दिसंबर 2018 को सुप्रीम कोर्ट ने यूनिटेक का फोरेंसिक ऑडिट करने का आदेश दिया था। कोर्ट ने कहा था कि फोरेंसिक आडिट होने तक यूनिटेक के प्रमोटर संजय चंद्रा को जमानत नहीं मिलेगी।
कोर्ट ने दो ऑडिटर नियुक्त करने का आदेश दिये थे। कोर्ट ने इन ऑडिटरों को 2006 से यूनिटेक की 74 कंपनियों व उनकी सहायक कंपनियों के खातों का ऑडिट करने का आदेश दिया था। 19 सितंबर 2018 को कोर्ट ने यूनिटेक के संजय चंद्रा और अजय चंद्रा की कस्टडी पेरोल की याचिका खारिज कर दी थी।
उसके पहले 11 सितंबर 2018 को भी सुप्रीम कोर्ट ने दोनों को कोई भी राहत देने से इनकार कर दिया था। कोर्ट ने कहा था कि पहले पैसा लाओ उसके बाद हम इस पर विचार करेंगे। 21 अगस्त 2018 को सुप्रीम कोर्ट ने अपनी तरफ से नियुक्त कमिटी को यूनिटेक के निदेशकों की ऐसी संपत्ति नीलाम करने को कहा जिस पर कोई कानूनी विवाद नहीं है।
16 जुलाई 2018 को सुप्रीम कोर्ट ने यूनिटेक की चेन्नई स्थित 12 एकड़ की जमीन को बेचने की इजाजत दे दी थी। उसके पहले 5 जुलाई 2018 को कोर्ट ने यूनिटेक की तीन संपत्तियों को नीलाम करने का आदेश दिया था। 9 अप्रैल 2018 को सुप्रीम कोर्ट ने यूनिटेक की संपत्तियों को बेचने के लिए सार्वजनिक सूचना आमंत्रित करने का निर्देश दिया था। 9 अप्रैल 2018 को ही यूनिटेक ने बिना कर्ज वाली अपनी संपत्तियों की लिस्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंपी थी।
कोर्ट ने यूनिटेक पावर ट्रांसमिशन कंपनी को शपूरजी पालोनी ग्रुप के हाथों बेचने की अनुमति दे दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने 30 अक्टूबर 2017 को यूनिटेक को आदेश दिया था कि वह 750 करोड़ दिसंबर 2017 तक जमा करें लेकिन यूनिटेक ने ये रकम जमा नहीं किया। 13 दिसंबर 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) द्वारा यूनिटेक को केंद्र सरकार द्वारा टेकओवर करने के आदेश देने के फैसले पर रोक लगा दी थी। केंद्र की ओर से अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने माफी मांगते हुए कहा था कि जब सुप्रीम कोर्ट में मामला लंबित है तो उन्हें एनसीएलटी में नहीं जाना चाहिए था। सुप्रीम कोर्ट ने एनसीएलटी के आदेश पर नाराजगी जताई थी। कोर्ट ने कहा था कि ये मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है और हमारे आदेश का पालन करना चाहिए था। कोर्ट ने सरकार द्वारा इस मामले पर एनसीएलटी जाने के तरीके पर भी आपत्ति जताई थी।
दरअसल कंपनी मामलों के मंत्रालय ने यूनिटेक के प्रबंधन को अपने हाथों में लेने के लिए एनसीएलटी में अर्जी दायर की थी। मंत्रालय ने इसके लिए कंपनी पर कुप्रबंधन एवं धन के हेरफेर का आरोप लगाया है। 8 दिसंबर 2017 को एनसीएलटी ने यूनिटेक के 10 निदेशकों को निलंबित करते हुए कंपनी बोर्ड में सरकार को अपने निदेशक नियुक्त करने की अनुमति दे दी। एनसीएलटी के इसी फैसले के खिलाफ यूनिटेक ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।


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मैं पिछले 19 साल से पत्रकारिता से जुड़ा हूं। मैने अपने कैरियर की शुरूवात लोकल अखबारों से की। वर्ष 2001 में दैनिक भास्कर के साथ जुड़ने का अवसर मिला। 2008 की शुरूवात में दैनिक भास्कर का साथ छुटा। इसके बाद मैने इंडिया न्यूज में गाजियबाद-नोएडा में ब्यूरो प्रभारी के रूप में काम किया। कई समाचार पत्रों में काम करने के बाद अक्टूबर 2009 में एनसीआर टुडे समाचार पत्र शरू किया। वर्तमान में उत्तर प्रदेश सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हूँ। मेरे मोबाइल नंबर 9899683800,पर किया जा सकता है।

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