एनसीआर टुडे. नई दिल्ली।
सुप्रीम कोर्ट ने आर्मी से कहा है कि महिला अफसर को ऐसे प्रताड़ित न कीजिए कि उन्हें कोर्ट आने को मजबूर होना पड़े। 39 साल की लेफ्टिनेंट कर्नल अनु डोगरा ने याचिका दायर कहा था कि उसको नागपुर के कामठी में अस्थाई तौर पर पोस्टिंग दी गई है, जहां उसके बच्चे के लिए क्रेच की सुविधा नहीं है। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली बेंच ने ये टिप्पणी की।
एडिशनल सॉलिसिटर जनरल माधवी दीवान ने कोर्ट को बताया कि लेफ्टिनेंट कर्नल अनु डोगरा की जिस जगह अभी पोस्टिंग मिली है, उससे महज 15 मिनट की दूरी पर क्रेच की सुविधा दी गई है। वहां अपने बच्चे को इस क्रेच में रखकर अपनी ड्यूटी को निभा सकती हैं।
इसके बाद कोर्ट ने याचिका का निपटारा कर दिया। याचिकाकर्ता की ओर से वकील ऐश्वर्या ने आशंका जताई कि लेफ्टिनेंट कर्नल अनु डोगरा को सुप्रीम कोर्ट का रुख करने के लिए विभागीय कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। इस पर जस्टिस चंद्रचूड़ ने एएसजी से कहा कि महिला अधिकारी को याचिका दाखिल करने के लिए मजबूर न होना पड़े। उसे काम के लिए अनुकूल माहौल दिया जाए। लेफ्टिनेंट कर्नल अनु डोगरा ने अपनी याचिका में 24 नवंबर और 29 दिसंबर 2018 के उस आदेश को निरस्त करने की मांग की थी जिनमें तबादले की खिलाफ दाखिल उनके आवेदन को खारिज कर दिया गया था।
डोगरा का तबादला जोधपुर से कहीं दूसरी जगह कर दिया गया है। याचिका में कहा गया था कि तबादला उन्हें प्रतािड़त करने के लिए किया गया है। उसका कहना था कि यह दो वर्षीय बच्चे की मां का अपमान करना है। महिला के पति भी जोधपुर में ही कार्यरत हैं।