इलाके संदिग्ध जिसके प्रदर्शन पुलिस पुलिस लगाते • अयोध्या में मंदिर निर्माण की मांग तेज, RSS चीफ काकोर्ट पर निशाना रामनगरी में धर्मसभा के बीच नागपुर से भागवत ने की आंदोलन की मांग •कहा- सरकार पर दबाव बनेगा तो मंदिर के लिए कानून बनाना ही होगा। • भागवत बोले, आक्रमणकारी बाबर को मुसलमानों से जोड़ना ठीक नहीं नागपुर (एजेंसी)। अयोध्या में शिवसेना चीफ उद्धव ठाकरे के होने और विश्व हिंदू परिषद की धर्मसभा के चलते आज वहां माहौल गर्म है। इस बीच, 900 किमी दूर नागपुर से आरएसएस चीफ मोहन भागवत ने भी राम मंदिर निर्माण के लिए सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश की है।
विश्व हिंदू परिषद की हुंकार रैली को संबोधित करते हुए उन्होंने साफ कहा कि अब धैर्य नहीं निर्णायक आंदोलन का वक्त आ गया है। कोर्ट पर निशाना साधते हुए भागवत ने कहा कि न्यायपूर्ण बात यही होगी कि जल्द मंदिर बने, लेकिन यह कोर्ट की प्राथमिकता में नहीं है तो सरकार सोचे कि मंदिर बनाने के लिए कानून कैसे आ सकता है। लड़ाई नहीं पर अइना होगा RSS चीफ ने कहा, लेकिन सावधान ! यह अपनी मांग है। आज लड़ाई नहीं है लेकिन अड़ना तो है। जन सामान्य तक यह बात पहुंचानी जरूरी है कि सरकार इसके लिए कानून बनाए और जनता का दबाव आएगा तो सरकार को मंदिर बनाना ही होगा। फिर एक बार संपूर्ण भारतवर्ष को मंदिर के लिए । खड़ा होना है। जो चित्र और मॉडल हमने सामने रखा है उसी के हिसाब से मंदिर बनना चाहिए। देश सुप्रीम कोर्ट पर साधा निशाना में जागरण का काम चले जब तक मंदिर निर्माण का काम शुरू न हो जाए। उन्होंने कहा, मामला कोर्ट में है, फैसला जल्द दिया जाना चाहिए। यह साबित भी हो गया है कि मंदिर वहां था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट इस केस को प्राथमिकता में नहीं रख रहा है। उन्होंने कहा कि इंसाफ में देरी अन्याय के बराबर है। जनहित के मामले टालने का अर्थ नहीं भागवत ने कहा कि वर्षों से मांग कर रहे हैं लेकिन सुनवाई नहीं हो रही है। कोर्ट की प्राथमिकता में यह नहीं है। जनहित के मामले टालते रहने का कोई अर्थ नहीं है। नीचे मंदिर था, यह खोदकर देखा जा चुका है। निर्णय आ गया कि मंदिर तोड़कर ढांचा बना था। सत्य और न्यायको अगर आपटालते चले गए और टालते ही रहना है तो मेरी एक प्रार्थना हैयहसंस्थानों में सिखाना नहीं चाहिए, इसे निकाल देना चाहिए। उन्होंने कहा कि समाज केवल कानून से नहीं चलता। श्रद्धा पर कोई सवाल नहीं उठा सकता है। कोर्ट का निर्णय अभी आएगा नहीं, क्योंकि वह प्राथमिकता में नहीं है। राम के समय में कोई वक्फ बोर्ड, अखाड़ा नहीं था। अपने तलवार के बल पर उस स्थान को जबरन अधिकार में लिया गया और मंदिर को गिराया गया। ऐसे में सरकार पर मंदिर के लिए दबाव बनाना ही होगा।